भारत के प्रत्यर्पण मजिस्ट्रेट के फैसले में कई खामियां हैं: माल्या के वकीलों का दावा है


(PTI) लंदन, ता। 11

एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में भारत में प्रत्यर्पण का सामना कर रहे दारू के एक भगोड़े कारोबारी विजय माल्या आज लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मौजूद थे। भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ माल्या की अपील पर आज अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, माल्या के वकीलों ने दावा किया कि प्रत्यर्पण पर मजिस्ट्रेट के आदेश में कई खामियां थीं।

किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख 2 वर्षीय माल्या को 7 अप्रैल को लंदन में छुरा घोंपा गया था, लेकिन बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

माल्या के वकीलों ने जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस लेउंग को बताया कि 5 दिसंबर को मुख्य मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बुथनट्रॉथ के प्रत्यर्पण के समर्थन में निर्णय में कई कमियां थीं।

माल्या के वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने कहा कि जब माल्या ने बैंक से कर्ज लिया, तो उनका इरादा बैंकों को धोखा देने का नहीं था। वकील ने आगे कहा कि जस्टिस एम्मा अर्बुथनॉट ने सभी सबूतों को सत्यापित किए बिना फैसला दिया था।

माल्या की अपील पर तीन दिन की सुनवाई होगी। क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस कल भारत सरकार की ओर से दलील देगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रतिनिधि भी अदालत में मौजूद थे।

गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में ब्रिटेन के पूर्व गृह सचिव साजिद जाविद ने माल्या को प्रत्यर्पण आदेश की अपील करने की अनुमति दी थी। माल्या के वकील भारत सरकार के इस दावे को भी चुनौती देंगे कि मुंबई के आर्थर रोड जेल में बैरक पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

उल्लेखनीय है कि माल्या को 3 लाख का अनंतिम बॉन्ड दिया गया था, जिसमें 1.5 मिलियन पाउंड का बॉन्ड और यात्रा करने की प्रतिबद्धता थी।

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