
नई दिल्ली, 24 सितंबर, 2021, शुक्रवार
तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्जा कर लिया है लेकिन जल्द ही उसे मजबूत राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
बताया जाता है कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, डॉ. अब्दुल्ला और तालिबान विरोधी प्रतिरोध बल के नेता अहमद मसूद और पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला एक दूसरे के संपर्क में हैं।
जिन लोगों को गिनी सरकार के दौरान 70 देशों में राजदूत नियुक्त किया गया है, वे भी वार्ता में शामिल हैं, और तालिबान का एक मजबूत राजनीतिक विकल्प जल्द ही उभर सकता है। सूत्रों के मुताबिक गठबंधन अफगानिस्तान के बाहर निर्वासित सरकार भी बना सकता है।
इस कदम के मद्देनजर दुनिया के अन्य देश तालिबान को मान्यता देने की जल्दी में नहीं होंगे। सूत्रों का कहना है कि तमाम दावों के बावजूद तालिबान सरकार व्यापक प्रभाव नहीं डाल पाई है। महिलाओं को भी उनके अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं और तालिबान द्वारा लोगों को सताया जा रहा है जब तालिबान के खिलाफ एक राजनीतिक विकल्प उठाना जरूरी है।
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