अफगानिस्तान में आतंकवाद को पनाह न दे, विश्व पटल पर भारत ने दोहराया


- जर्मनी ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें महिलाओं के मानवाधिकारों, एक प्रतिनिधि सरकार स्थापित करने में विफलता और अफगानिस्तान में खराब आर्थिक और सामाजिक स्थितियों के बारे में सवाल उठाए गए।

नई दिल्ली, 12 नवंबर 2022, शनिवार

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अफगानिस्तान को लेकर चिंता जताई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवादियों को शरण देने या प्रशिक्षण देने के लिए नहीं किया जाए। खासकर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन, जिन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाबंदी लगा रखी है, उन्हें यहां शरण नहीं लेनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आर रवींद्र ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान अफगानिस्तान के संबंध में नई दिल्ली की सुरक्षा चिंताओं को व्यक्त किया। गौरतलब है कि जैश और लश्कर के आतंकियों को पाकिस्तान से अफगानिस्तान शिफ्ट किया जा चुका है।

भारत ने यह सवाल उठाया

जर्मनी ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव ने महिलाओं के मानवाधिकारों, एक प्रतिनिधि सरकार स्थापित करने में विफलता और अफगानिस्तान में खराब आर्थिक और सामाजिक स्थितियों पर सवाल उठाया। प्रस्ताव के पक्ष में 116 मत और विरोध में 10 मत प्राप्त हुए, जबकि 67 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया। रवींद्र ने कहा कि भारत यूएनएससी निगरानी दल द्वारा निभाई गई उपयोगी भूमिका को नोट करता है। यह संगठन से उन सभी आतंकवादी समूहों की निगरानी और रिपोर्ट जारी रखने की भी उम्मीद करता है जो अन्य देशों को लक्षित करने के लिए अफगानिस्तान को आधार के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

लश्कर और जैश के लड़ाके पाकिस्तान से अफगानिस्तान आए हैं

निगरानी टीम ने हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के लड़ाकों से बात की है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्ट्स में भी कहा गया है कि दोनों प्रतिबंधित संगठनों ने अपने लड़ाके अफगानिस्तान भेजे हैं। पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के दबाव के बाद यह कदम उठाया गया है। इन दबावों के बाद पाकिस्तान में मौजूद लश्कर और जैश ने अपने लड़ाकों को अफगानिस्तान भेज दिया है। रवींद्र ने कहा कि अफगानिस्तान के प्रति हमारा रवैया ऐतिहासिक मित्रता और विशेष संबंधों के अनुरूप होगा। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है।

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