
दावे / संयुक्त राष्ट्र, ताल। 23 जनवरी, 2020, गुरुवार
पाकिस्तान ने एक बार फिर से दावोस में अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को उठाया और भारत को पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक संकट के लिए अप्रत्यक्ष रूप से दोषी ठहराया। भारत ने गुरुवार को इमरान खान के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान से स्पष्ट है कि वह कितने निराश हैं और वह दुनिया को गुमराह कर रहे हैं।
इमरान खान के बयान पर सवाल उठाते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पूछा कि अगर पाकिस्तान भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंधों को लेकर गंभीर है तो वह आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सूट में कई बातें कही हैं। हालांकि, उनके बयान कोई नई बात नहीं है। इस तरह से पाकिस्तान कई महीनों से जहर उगल रहा है।
वह कई विरोधाभासी बयान दे रहा है और उसके बयानों में तथ्यात्मक त्रुटियां हैं। यह सब दिखाता है कि इमरान खान कितने निराश हो गए हैं। वे निराशा की भावना के लिए जोर दे रहे हैं।
पाकिस्तान को यह महसूस करना होगा कि वैश्विक समाज उसके दोहरे मानदंडों को समझता है। एक ओर, वह खुद को आतंकवाद से त्रस्त देश बताता है। दूसरी ओर, यह उन आतंकवादी संगठनों का समर्थन करता है जो भारत और अन्य देशों में आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।
रवीश कुमार ने कहा, "अगर पाकिस्तान भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, तो वह आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है?" हमें लगता है कि पाकिस्तान हमेशा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के लिए ऐसे बयान देता है।
उसे इस तरह के बयान देना बंद करना चाहिए। रवीश कुमार ने आतंकवाद के लिए पाकिस्तान की फंडिंग पर भी चिंता जताई। उसने कहा। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान पर हमला किया है। 16 फरवरी को पेरिस में एक बैठक हो रही है।
हमें लगता है कि यह बैठक इस बात पर भी गौर करेगी कि पाकिस्तान ने आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए कितना काम किया है। पाकिस्तान जिस तरह से आतंकवाद का वित्तपोषण कर रहा है वह चिंताजनक है। अब FATF के सदस्यों को देखना होगा कि ईरानी सरकार ने इसे रोकने के लिए क्या किया है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने पाकिस्तान को पटकनी दी थी। भारत के उप दिवंगत प्रतिनिधि नागराज नायडू ने पाकिस्तान के बयान को 'जहरीला' और 'हृदयहीन' बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अभद्र भाषा की स्थापना की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सच्चाई के बारे में अंधेरे में रखा।
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