
(PTI) लंदन, ता। 11 फरवरी, 2020, मंगलवार
एक शराबी व्यवसायी विजय माल्या, जो 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में भारत में प्रत्यर्पण का सामना कर रहा है, आज लंदन के रॉयल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में पेश हुआ।
भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ माल्या की अपील पर आज अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, माल्या के वकीलों ने दावा किया कि प्रत्यर्पण पर मजिस्ट्रेट के आदेश में कई खामियां थीं।
किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख 64 वर्षीय माल्या को अप्रैल 2017 में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। वह तब से जमानत पर रिहा है।
वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। माल्या के वकीलों ने जस्टिस स्टीफन इरविन और जस्टिस लेउंग को बताया कि दिसंबर 2018 में मुख्य मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बुथनॉट के प्रत्यर्पण के समर्थन में फैसले में कई कमियां थीं।
माल्या के वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने कहा कि जब माल्या ने बैंकों से कर्ज लिया, तो उनका इरादा बैंकों के साथ धोखा करने का नहीं था। अभियोजक ने आगे कहा कि न्यायमूर्ति एम्मा अर्बुथनॉट ने सभी सबूतों को सत्यापित किए बिना फैसला दिया।
माल्या की अपील पर तीन दिन की सुनवाई होगी। क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस कल भारत सरकार की ओर से दलील देगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के प्रतिनिधि भी अदालत में उपस्थित थे।
गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में ब्रिटेन के पूर्व गृह सचिव साजिद जाविद ने माल्या के प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति दी थी। माल्या के वकील भारत सरकार के इस दावे को भी चुनौती देंगे कि मुंबई के आर्थर रोड जेल में बैरक 12 पूरी तरह से सुरक्षित हैं। माल्या को 2017 में बांड और यात्रा प्रतिबंध सहित 6.5 मिलियन पाउंड की शर्त के तहत 2 जमानत दी गई थी।
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