बड़े कछुए रेगिस्तान में पाए जाते हैं, आकार एक कार जितना बड़ा है


नई दिल्ली, 14 फरवरी 2020, शुक्रवार

एक बार धरती पर डायनासोर जैसे विशालकाय जानवर थे। इन डायनासोरों के जीवाश्म भी कई स्थानों पर पाए गए हैं। इसी तरह कछुए के अवशेष हाल ही में मिले हैं। ये जीवाश्म कोलंबिया के ताताकोआ रेगिस्तान में पाए जाते हैं। कछुआ एक कार के आकार के बारे में है।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि कछुए की लंबाई 13 फीट और वजन लगभग 2.5 टन है। यह अनुमान है कि कछुओं की उत्पत्ति लगभग 13 मिलियन वर्ष पहले उत्तरी दक्षिण अमेरिका में हुई थी। वैज्ञानिकों ने इसे स्टूपेंडेमी जियोग्राफिक्स नाम दिया है। यह कोलंबिया के ताताकोआ रेगिस्तान और वेनेजुएला के उरुमाको क्षेत्र में पाया जाता है।

आमतौर पर कछुए में सींग नहीं होते हैं, लेकिन जो कछुआ रहता है वह सींग और नर कछुआ होता है। इन सींगों से वह अन्य जानवरों से अपनी रक्षा करेगा। इसके अलावा वह एक मादा कछुए के लिए लड़ रही होगी।

इस खोज का नेतृत्व बोगोटो के जीवाश्म वैज्ञानिक एडविन क्वाडेना ने किया था। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इतने बड़े कछुए के जीवाश्म मिले हैं। स्टुपेंडेमी कछुओं के अवशेष भी पहले 1970 में पाए गए थे। लेकिन इसके बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सीइंग आर्बिलॉन पृथ्वी पर सबसे बड़ा कछुआ होने के लिए प्रसिद्ध है। इसके बाद स्टुपेंडेमी आता है। लगभग 700 मिलियन वर्ष पहले धरती पर सीगोइंग आर्केलोन डायनासोर रहते थे। इसकी लंबाई 4.6 मीटर थी।



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