संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2019 में हर पांच एच -1 बी वीजा आवेदनों में से एक को खारिज कर दिया


(पीटीआई) वाशिंगटन, ता। 5 फरवरी, 2020, गुरुवार

2019 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने हर पांच एच 1 बी अनुप्रयोगों में से एक को खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से H1B वीजा की मंजूरी की दर में लगातार गिरावट आ रही है। दूसरी ओर, टीसीएस और इन्फोसिस जैसी भारतीय कंपनियों को अमेरिकी कंपनियों की तुलना में एचबीबी अनुरोधों को अस्वीकार करने की अधिक संभावना है।

एच 1 बी वीजा एक गैर-आप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका स्थित प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन के हजारों कर्मचारियों की भर्ती करती हैं।

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में एच 1 बी अनुप्रयोगों को रद्द करने का अनुपात 2018 की तुलना में थोड़ा कम है। 2018 में एच 1 बी वीजा को रद्द करने की दर 24% थी, जो कि 2019 में 21% तक कम है।

हालांकि, भारतीय आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और विप्रो के लिए H1B वीजा आवेदनों की अस्वीकृति की दर बहुत अधिक है, जबकि दूसरी ओर, अमेरिकी प्रौद्योगिकी अमेज़ॅन और Google द्वारा H1B वीजा अनुप्रयोगों की गिरावट बहुत कम है।

इस पर आँकड़ों पर नज़र डालें तो 2019 में TCS और Infosys H1B वीजा आवेदनों की अस्वीकृति की दर क्रमशः 31% और 35% थी। हालांकि, अन्य विप्रो और टेक महिंद्रा के लिए क्रमशः 47 और 37 प्रतिशत की दर थी।

दूसरी ओर, अमेरिकी कंपनियों अमेजन के लिए अनुपात चार प्रतिशत, Google के लिए चार प्रतिशत, माइक्रोसॉफ्ट के लिए 6 प्रतिशत, वॉलमार्ट के लिए तीन प्रतिशत और फेसबुक के लिए तीन प्रतिशत था।

ट्रम्प प्रशासन को 2020 में H1B वीजा के लिए नए नियमों की घोषणा करनी है। ये नियम संयुक्त राज्य में काम करने वाली कंपनियों के लिए अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए और अधिक कठिन बनाते हैं।

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