नई दिल्ली, ता। 24 मार्च 2020, मंगलवार
वर्ष 2020 एक महामारी के साथ शुरू हुआ जिसकी दुनिया ने कल्पना भी नहीं की होगी। चीन के वुहान में उत्पन्न नॉवेल कोरोना वायरस (कोविट -19) ने आज पूरी दुनिया को अपने जाल में फंसा लिया है। चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कोरोना वायरस को उसके सभी शहरों में ले जाया गया है, जिसमें वुहान भी शामिल है, और दुनिया के अन्य देश युद्ध जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं।
अकेले इटली में अब तक 5477 लोगों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 और भारत में कुल 582 मौतें हुई हैं। जबकि पूरी दुनिया वायरस को रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है, चीन ने वायरस को बाहर निकालने में अपनी भूमिका पर सवाल उठाया है और इसे कोविद -19 के नियंत्रण में रखा है, जो कई सवाल उठाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अधिकारी गौडेन गालिया ने कहा कि चीनी सरकार वुहान में कोरोना वायरस के प्रकोप के कारणों की जांच कर रही थी और उनकी जांच में विश्व स्वास्थ्य संगठन शामिल नहीं था। हम इस जांच में चीनी सरकार की सहायता के लिए तत्पर हैं। हालांकि चीनी सरकार वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन दुनिया के देशों को चीनी जांच पर संदेह है।
जेएनयू के प्रोफेसर अश्विन महानगा ने चीनी सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया कि चीनियों ने कहा कि उनकी जांच में वायरस के मानव से मानव में फैलने पर कोई सबूत नहीं मिला। प्रो। अश्विन महानाग ने कहा, "हम चीन के ऐसे किसी भी दावे पर विश्वास नहीं करते हैं।" कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट कर चीन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन ने डब्ल्यूएचओ को कोरोना वायरस की जांच से बाहर क्यों रखा है, चीन क्या छिपा रहा है।
गौडेन गालिया के अनुसार, किसी भी जानवर से इंसानों में वायरस फैलने में कई साल लग जाते हैं। सार्स जैसी खतरनाक बीमारी के प्रसार के बाद से 10 साल से अधिक समय हो गया है। विषय से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि वायरस चीन की लैब में बनाया गया है और चीन स्वतंत्र रूप से जाँच किए बिना कुछ छिपा रहा है।
ज्यूडीशियल वॉच इंजन फ़्रीडम वॉच के लैरी क्लेन के सह-संस्थापक ने कोविद -19 पर वुहान, चीन में बने जैविक हथियार होने का आरोप लगाया है। लैरी क्लेमेंस ने वुहान स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पर 20 ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया है। लैरी क्लेमन ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और वुहान स्थित लैब को दोषी ठहराया। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना के अधिकारी वुहान-स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एंड मेजर जनरल (वायरोलॉजिस्ट) के निदेशक शी जिंगली वी लैब की गतिविधियों की निगरानी करते हैं।
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