- अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का चीन का फैसला

वाशिंगटन / बीजिंग, 25 मई, 2020, सोमवार
अमेरिका और चीन के बीच टकराव जारी है। अमेरिका ने नौ चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया। ये कंपनियां अब अमेरिकी तकनीक तक नहीं पहुंच पाएंगी। चीन ने अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का भी फैसला किया है।
कोरोना महामारी के बीच अमेरिका और चीन के बीच भी तनाव बढ़ गया है। कोरोना फैलने के मुद्दे पर अमेरिका चीन को सबक सिखाने के मूड में है। अमेरिका ने चीनी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है। शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकारों के हनन के लिए अमेरिका ने चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ये कंपनियां अब अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। इसमें 3 विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने घोषणा की कि उसने चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
इस कदम की अमेरिका के फैसले के बाद कई संगठनों और विशेषज्ञों ने आलोचना की थी। QUHO 200 नामक कंपनी ने अमेरिकी कदम को "राजनीतिक और भेदभावपूर्ण" कहा। चीन के पूर्व वाणिज्य मंत्री ने चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक नई प्रौद्योगिकी युद्ध शुरू किया है, जिसका स्थायी प्रभाव होगा। चीन अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करके भी जवाबी कार्रवाई करेगा।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक और शीत युद्ध के लिए जिम्मेदार होगा। अमेरिका चीन के साथ टकराव की स्थिति में दुनिया को ठंडे युद्ध में धकेल रहा है। अगर अमेरिका ऐसे कदम उठाता रहा तो चीन भी जल्द जवाब देगा। चीन ने अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने बताया कि चीन सूची जारी कर अमेरिका को जवाब देगा। अखबार ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा कि चीन एप्पल और क्वालकॉम जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाएगा। चीन ने सरकार द्वारा संचालित हुआवेई पर अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद भी अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।
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