चीनी कंपनियों को अमेरिका से बाहर निकाला जाए, अमेरिकी सीनेट में पारित बिल को डिलिवर किया जाए

वाशिंगटन, ता। 21 मई, 2020, गुरुवार

कोरोना वायरस के वैश्विक प्रकोप के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका चीन के साथ लॉगरहेड्स पर रहा है। कोरोना वायरस फैलाने के लिए अमेरिका ने चीन को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार चीन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। साथ ही वे चीन को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं। अब अमेरिका चीन को घेरने की कोशिश कर रहा है। आर्थिक रूप से भी, अमेरिका एक के बाद एक चीन को एक मोड़ दे रहा है। उसी नस में, अब अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों की बारी है। अमेरिका इन कंपनियों को निष्कासित करने की तैयारी कर रहा है।

अमेरिकी सीनेट ने एक विधेयक पारित किया है जिससे यह कटौती की जा सकती है। यह बिल एक डीलिस्टिंग बिल है। अमेरिका ने चीनी कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने का बिल पास कर दिया है। हालांकि यह थोड़ा कानूनी प्रक्रिया के बाद लागू होगा। सीनेट में पेश किए गए विधेयक को विपक्ष ने भी समर्थन दिया है। अमेरिकी फैसले ने अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों के लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं। बिल में कहा गया है कि अमेरिकी कंपनियों में निवेश बढ़ाने का फैसला किया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 800 चीनी कंपनियां अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं। अमेरिका के फैसले से अलीबाबा और Baidu जैसी बड़ी कंपनियों को भी नुकसान होगा। वहीं, इस फैसले का दुनिया भर के शेयर बाजारों पर असर पड़ेगा। यह अपशगुन बुरा होगा। इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में कहा है कि चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जनवरी 2020 के व्यापार समझौते को रद्द किया जा सकता है। सामूहिक रूप से, वैश्विक व्यापार युद्ध T5 में बड़े पैमाने पर घट रहा है।


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