
काबुल, ता। 16 मई 2020, शनिवार
अफगानिस्तान में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले ने एक नवजात शिशु को चमत्कारी रूप से बचाया है और साथ ही यह कहावत है कि बचावकर्ता हत्यारे से बड़ा होने के कारण एक बार फिर रोष में आ गया है। एक बच्ची को उसके जन्म के तीन घंटे के भीतर ही आतंकवादियों ने मार डाला और भले ही वह एक नवजात शिशु थी, आतंकवादियों ने उस पर कोई दया नहीं दिखाई। आतंकवादियों ने लड़की को दो बार गोली मारी और भाग गए, लेकिन भगवान ने कुछ और की अनुमति दी।
आतंकवादियों ने काबुल के एक प्रसूति अस्पताल पर हमला किया, जिसमें 24 लोग मारे गए। इसमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें दो नवजात शिशु भी शामिल थे। एक बच्ची को उसके जन्म के तीन घंटे के भीतर ही आतंकवादियों ने बेरहमी से पीटा लेकिन दो गोलियां बचीं, जबकि उसकी मां ने हमले में अपनी जान गंवा दी।
पता चला है कि ISIS के तीन आतंकियों ने अस्पताल में हमला किया और घुसते ही बम और गोलियां बरसाईं। आतंकवादी पुलिस की वर्दी पहनकर अस्पताल में दाखिल हुए और कमरों में हैंड ग्रेनेड फेंकना शुरू कर दिया। हमले में अन्य 15 लोग घायल हो गए और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकवादी मारे गए।
नवजात की सर्जरी
दो गोलियां लगने के बाद लड़की का दाहिना पैर गंभीर रूप से घायल हो गया और डॉक्टरों ने सर्जरी के जरिए दोनों गोलियां निकाल दीं। ऑपरेशन के बाद लड़की को काबुल के इंदिरा गांधी चिल्ड्रन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि उसके शरीर से गोली निकाल दी गई है और वह भविष्य में आसानी से दौड़ सकेगा।
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