पाकिस्तान में इमरान की लोकप्रियता के निचले पायदान पर सेना की पकड़ मजबूत होती गई

- पिछले दो महीनों में कई प्रमुख पदों पर नियुक्त सेना के अधिकारी: सैन्य अधिकारियों के हाथों में सरकारी सत्ता


इस्लामाबाद, 10 जून, 2020, बुधवार

पाकिस्तान एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इसी बीच कोरोना की हालत बिगड़ गई। इसकी वजह से सरकार पर इमरान की पकड़ ढीली हो गई है।

प्रधान मंत्री इमरान खान की आर्थिक संकट, कमजोर विदेश नीति, बेरोजगारी सहित कई मुद्दों पर आलोचना की गई। इस सब के बीच, कोरोना की महामारी का प्रकोप हुआ। इससे इमरान के लिए स्थिति और खराब हो गई।

काटना। पीएम इमरान के हाथों से सत्ता की पकड़ ढीली हुई है। पिछले एक महीने में दर्जनों प्रमुख पदों पर सेना के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। असली ताकत इन अधिकारियों के हाथों में है। ऐसी भी खबरें थीं कि सेना प्रमुख बाजवा व्यापारियों के साथ बैठकें करके महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे थे।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सैन्य अधिकारी भी निर्णय लेते हैं। विदेश नीति में उनका दखल भी बढ़ा है। रक्षा पर सेना की पकड़ पहले से मजबूत है। ऐसी स्थिति में, इमरान के हाथों में केवल नाममात्र की शक्ति है।

सैन्य अधिकारी सत्ता के शीर्ष पर हैं। या सत्ता का धनुष सेना के उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा नियुक्त अधिकारियों के हाथों में होता है। इमरान की लोकप्रियता तह तक गई है। सेना की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। ऐसी चर्चा है कि अगर सेना ने कब्जा कर लिया तो इमरान को किसी भी समय बाहर कर दिया जाएगा।

इमरान के विश्वासपात्रों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है और जांच शुरू की गई है। इमरान खान लोगों की नजरों से ओझल हो गए हैं। इमरान, जो एक क्रिकेटर के रूप में बहुत लोकप्रिय थे, पाकिस्तान में बहुत लोकप्रिय थे जब उन्हें पीएम चुना गया था।

लोगों ने पाकिस्तान में परिवर्तन की उसकी नीति पर विश्वास व्यक्त किया। सेना ने भी इमरान का समर्थन किया, लेकिन अब इमरान का कोई लोकप्रिय समर्थन नहीं है। पाकिस्तान सेना भी अब लंबे समय तक इमरान पर भरोसा करने की संभावना नहीं है।

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