
बीजिंग, ता। 25 अगस्त 2020 को मंगलवार है
चीन और पाकिस्तान दोनों के बीच एक खतरनाक साजिश को उजागर किया गया है। चीन और पाकिस्तान दोनों ही 2015 से खतरनाक कीटाणुओं का प्रयोग कर रहे हैं। यह घातक साजिश चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के पीछे चल रही है। कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर विवादों में घिरी चीन की वुहान वायरोलॉजी लैब को प्रयोग को अंजाम देने का काम सौंपा गया है। क्लेक्सन की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। वुहान वायरोलॉजी लैब के वैज्ञानिकों का एक दल एक घातक वायरस पर पाकिस्तान के साथ काम कर रहा है। पाकिस्तान में पिछले पांच सालों से इस तरह के परीक्षण चल रहे हैं।
पिछले महीने, यह पता चला था कि चीन और पाकिस्तान ने जैविक हथियारों की क्षमता बढ़ाने के लिए तीन साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वुहान संस्थान और पाकिस्तान में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए पांच प्रयोगों को एक वैज्ञानिक शोध पत्र में प्रकाशित किया गया है। प्रत्येक प्रयोग zoonotic रोगजनकों की पहचान और उनके लक्षणों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। ये सभी रोगाणु संक्रामक हैं और जानवरों से मनुष्यों में फैलते हैं। इस प्रयोग में वेस्ट नाइल वायरस, मरकरी कोरोना वायरस, बुखार वायरस, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया जैसे वायरस शामिल थे। ये सभी रोगाणु हैं जिनके लिए कोई दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट का दावा है कि पांच प्रयोगों के लिए हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के रक्त के नमूने एकत्र किए गए थे। ये सभी लोग हिंडन में रहते हैं और जानवरों के साथ भी रहते हैं। चीन ऐसे प्रयोगों के लिए पाकिस्तानी वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित कर रहा है।
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