ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन सरकार न केवल युवाओं के लिए बल्कि बुजुर्गों के लिए भी एंटीबॉडी विकसित करने में सफल होती है

लंदन, ता। सोमवार, 26 अक्टूबर, 2020

दुनियाभर में कोरोना वायरस का प्रसार बढ़ रहा है। तब दुनिया के सभी लोग एक सफल वैक्सीन का इंतजार कर रहे हैं ताकि इस बीमारी से छुटकारा मिल सके। फिर सवाल यह है कि क्या कोरोना वैक्सीन जो बुजुर्गों के लिए प्रभावी होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि बुजुर्गों की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कम है। कोरोना वैक्सीन, जिसे ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका ने एक साथ विकसित किया है, बुजुर्गों में प्रभावी दिखाया गया है।

दुनिया भर में कई कोरोना टीके विकसित किए जा रहे हैं। ऑक्सफोर्ड का कोरोना वैक्सीन सभी में सबसे अधिक आशाजनक है। वर्तमान में कोविशिल्ड वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण में पाया गया कि टीका न केवल युवा बल्कि बुजुर्गों के लिए भी प्रभावी था। वैक्सीन ने बुजुर्गों में भी एंटीबॉडी विकसित की है, जो कोरोना से लड़ने में सक्षम हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वैक्सीन ने बुजुर्गों में एंटीबॉडी और टी कोशिकाओं के विकास का कारण बना है। किसी भी बीमारी से लड़ने में एंटीबॉडी और टी कोशिकाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अधिकांश टीके केवल एंटीबॉडी विकसित करते हैं, जबकि ये टीके टी कोशिकाओं का भी उत्पादन करते हैं।

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