
(पीटीआई) ह्यूस्टन, टा। 13
टेक्सास स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने अणु की उत्पत्ति की खोज की है जो कोरोना का पोषण करता है। कोरोना वायरस से प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करने वाले प्रोटीन को रोकने में शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। इस विधि से वैक्सीन खोजने में आसानी होगी।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की प्रतिकृति को रोकने के लिए एक विधि की खोज करने का दावा किया है। कोरोना वायरस एक कॉपी से दूसरी कॉपी करता है, जिससे पूरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। वैज्ञानिकों ने एक अणु की खोज की है जो कि नकल करता है। अगर इसे वहीं रोक दिया जाए तो वायरस की प्रतिकृति बंद हो जाएगी।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यदि कोरोनवायरस वायरस पीएलप्रो को बढ़ने से रोक दिया जाता है, तो इसकी शक्ति सीमित हो जाएगी। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के अणु की पहचान की है जो यह काम करता है और इसे नियंत्रित करने का एक तरीका भी खोज लिया है।
टेक्सास हेल्थ साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर वायरस को दोहराया जाए तो वैक्सीन खोजने का काम आसान हो जाएगा।
साइंस जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस से पीएलप्रो प्रोटीन संक्रमण बहुत जल्दी फैलता है। कोरोना के उत्तेजक दोहरे नाम सीज़र कोरोना को और भी भयानक और खतरनाक बनाता है। यह खतरनाक PLPro प्रोटीन के स्राव को बढ़ावा देता है।
यदि इसे रोक दिया जाता है, तो निर्वहन बंद हो जाएगा। यह विकसित होने वाले कोरोना वायरस के रूपों को भी रोक देगा। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमले को कम किया जाएगा और शरीर की रक्षा की जाएगी। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस से मजबूत साबित होकर शरीर की रक्षा करेगी। वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में दावा किया है कि इस शोध से वैक्सीन के आविष्कारकों को काफी सुविधा होगी। यह खोज एक प्रभावी टीका खोजने में मदद करेगी।
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