
वाशिंगटन, ता। 23 अक्टूबर 2020, शुक्रवार
दिसंबर तक एच -1 बी वीजा पर प्रतिबंध लगाने के ट्रम्प के फैसले पर 100 बिलियन का खर्च आया है। अमेरिकी थिंक टैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था। इसका 500 कंपनियों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और आने वाले वर्षों में भी इसका प्रभाव बना रहेगा।
अमेरिकी थिंक टैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रम्प के वीजा पर प्रतिबंध के फैसले पर 100 बिलियन का खर्च आएगा। ट्रम्प ने 22 जून को कार्यकारी आदेश की घोषणा की और दिसंबर 2020 तक इसे प्रतिबंधित कर दिया। इसने संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है, विशेष रूप से एच -1 बी वीजा श्रेणियों पर।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस फैसले का 500 कंपनियों पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ा है। विदेशों से आए कुशल कामगारों की आमद से आईटी सेक्टर को सबसे ज्यादा झटका लगा है। एच -1 बी वीजा आईटी पेशेवरों के बीच सबसे लोकप्रिय हैं और कई भारतीय आईटी पेशेवर वीजा की इस श्रेणी में अमेरिका जाते हैं।
ब्रुकिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प के फैसले ने लगभग दो मिलियन विदेशी विशेषज्ञों को संयुक्त राज्य में आने से रोक दिया। यह नुकसान एक बार काफी नहीं होगा। थिंक टैंक का दावा है कि ट्रम्प के लापरवाह फैसले से आने वाले वर्षों में नतीजे मिलेंगे। शायद यह स्थायी आधार पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प की वीजा नीति का अमेरिकी कार्य संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
थिंक टैंक का अनुमान है कि विदेशी विश्वविद्यालयों का अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर भी असर होगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर ट्रम्प के निर्णय का प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। रिपोर्ट को तीन प्रोफेसरों ने एक साथ तैयार किया था। पृथ्वीराज चौहान, जो कि हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल, ब्रेटा ग्लेनॉन, पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं, और ब्रूक्सिंग इंस्टीट्यूशन के एक विशेषज्ञ डैनी बहसर ने अपने आँकड़ों का अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें