
लंदन, ता। गुरुवार, 19 नवंबर, 2020
The क्लाइमेट ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट 2020 ’को रेखांकित किया गया कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कौन से देश जी 20 स्थिति में हैं। 72 पन्नों की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण 1999 से 2018 तक हर साल औसतन 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
अगर हम आर्थिक नुकसान की गणना करें तो अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले वर्षों में औसतन 15 5.158 बिलियन (3.82 लाख करोड़ रु।) का नुकसान उठाया है। चीन 2.61 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है।
इन 20 वर्षों के दौरान, भारत में हर साल मौसम संबंधी आपदाओं से औसतन 2925 मौतें हुई हैं। रूस में सबसे अधिक 2939 मौतें हुई हैं। फिर भारत आता है। भारत का प्रति व्यक्ति वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्पादन औसतन 2 टन है, जो जी -20 के औसत से बहुत कम है। दूसरी ओर, वायु प्रदूषण भारत में एक वर्ष में एक मिलियन से अधिक लोगों को मारता है, एक बहुत ही उच्च आंकड़ा है।
दुनिया के 14 प्रमुख पर्यावरण संगठनों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। पेरिस समझौते का उद्देश्य कार्बन उत्पादन को कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा-स्वच्छ ऊर्जा का अधिक उपयोग करना है।
भारत निश्चित रूप से इस दिशा में काम कर रहा है। बेशक, कोई भी देश पेरिस समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं करता है, लेकिन कुछ देश जो पर्यावरणीय मुद्दों पर गंभीरता से काम करते हैं, उनमें भारत शामिल है। पिछले 20 वर्षों में पर्यावरणीय आपदाओं में सभी जी 20 देशों ने 2.20 लाख लोगों की जान गंवाई है। पूरे देश का कुल नुकसान 2600 बिलियन है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें