
वाशिंगटन, ता। 16. बुधवार, दिसंबर, 2020
अनुसंधान से पता चलता है कि दवा कंपनियां कितनी भी कोशिश क्यों न करें, 2022 तक दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत आबादी को कोरोना का टीका नहीं लगाया जाएगा।
एक प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रिका में प्रकाशित एक शोध पत्र में कहा गया है कि टीकों के वितरण का कार्य विकासशील टीकों जितना ही चुनौतीपूर्ण है। दुनिया भर में अनुमानित 3.7 बिलियन वयस्क टीकाकरण करना चाहते हैं। यह आंकड़ा उन चुनौतियों की ओर इशारा करता है जो आपूर्ति की मांग करती हैं, खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में।
संयुक्त राज्य अमेरिका में जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं का कहना है कि शोध से पता चलता है कि उच्च आय वाले देशों ने भविष्य में कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति हासिल कर ली है, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में कब और कैसे पहुंचेगा, इस बारे में अभी भी अनिश्चितता है।
विकसित होने वाले कोरोना वैक्सीन की खुराक का पचास प्रतिशत उच्च आय वाले देशों में जाएगा। इन देशों में दुनिया की आबादी का 14 प्रतिशत हिस्सा है और शेष खुराक दुनिया की शेष आबादी के लिए है। जो 85 प्रतिशत है। इस प्रकार, 2022 तक, दुनिया की कम से कम 25 फीसदी आबादी वैक्सीन तक नहीं पहुंच पाएगी।
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