
(PTI) काठमांडू, ता। 28
नेपाल में राजनीतिक संकट के बाद से चीन सक्रिय है। ओली और प्रचंड के बीच मतभेद बढ़ने के बाद ओली ने संसद को भंग कर दिया है। प्रचंड ने सत्ताधारी दल का दामन थाम लिया है। इन सबके बीच, चीन नेपाल में दखल देकर अपना पैर जमाने की कोशिश कर रहा है।
नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी विभाजित है। मसला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। संसद भंग करने और फैसले के बढ़ते विरोध को लेकर नेपाल में नाराजगी है। इस बीच, जब नेपाल के राजनीतिक संकट में चीन ने दखल देना शुरू किया तो लोग ज्यादा नाराज हुए।
जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल ने पुष्पा कमल दहल-प्रचंड और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार से मुलाकात की। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और उप मंत्री जू योज़ू के नेतृत्व में जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल में डेरा डाल दिया है। इस मुद्दे पर चीनी प्रतिनिधियों ने नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रचंड और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार से मुलाकात के बाद चर्चा की।
जिनपिंग का संदेश लाने वाले प्रतिनिधियों ने प्रचंड और ओली को सलाह दी कि वे आंतरिक मतभेदों को ठीक से चर्चा करके हल करें। चीन, जो विवेक दिखा कर देश के हित में मतभेदों को हल करने की सलाह देता है, वास्तव में ऐसे राजनीतिक संकट में भी नेपाल पर अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। चीन सहयोगी सहयोगी होने का बहाना करके नेपाल में कूटनीति को मजबूत करना चाहता है।
लेकिन नेपाल के लोगों को यह मंजूर नहीं है। नेपाल के नागरिकों ने चीनी प्रतिनिधिमंडल का विरोध किया। चीन के हस्तक्षेप से संसद के बाहर के लोग नाराज थे। लोगों ने बैनर लिए और संसद के बाहर नारेबाजी करते हुए चीनी प्रतिनिधिमंडल के पास लौट आए। यही नहीं, लोगों ने नेपाल की उस जमीन को वापस करने की भी मांग की, जिसे चीन ने जब्त कर लिया था।
नेपाल के नागरिकों ने भी चीनी दूतावास के बाहर रैली की। दूतावास के बाहर लोगों ने प्रतिनिधिमंडल को वापस बुलाने के लिए नारे लगाए।
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