
(PTI) बीजिंग, ता। मंगलवार, 9 मार्च, 2021
1959 से तिब्बत पर चीन का कब्जा है। चीन ने तिब्बत जैसे देश पर आक्रमण किया है और तब से तिब्बत के सर्वोच्च नेता दलाई लामा भारत में रह रहे हैं। तिब्बत पर चीन का आधिपत्य आधी सदी से अधिक समय से चल रहा है, लेकिन तिब्बती लोगों ने कभी भी चीन की संप्रभुता को ईमानदारी से स्वीकार नहीं किया। तिब्बतियों ने खुद को चीनी संस्कृति से अलग कर लिया है।
अगर हम किसी भी व्यक्ति को वश में करना चाहते हैं, तो हमें उनकी संस्कृति पर हमला करना होगा। चीन ने कई सालों तक उस रास्ते का अनुसरण किया है। चीन के पास तिब्बत में विकास के बहाने पाँच वर्षों में 30 30 बिलियन खर्च करने की एक विशाल परियोजना है। चीन ने भारत के साथ तिब्बत की सीमा पर हाई-स्पीड रेलवे लाइन बिछाना शुरू कर दिया है।
चीन अब तिब्बती गांवों तक सड़क और अन्य सुविधाएं विकसित करने की प्रक्रिया में है। तिब्बत के भूमाफिया होने के कारणों में से चीन का तिब्बत पर कोई प्रभाव नहीं है। तिब्बत का पूरा देश दस से पंद्रह हजार फीट की ऊंचाई पर फैला हुआ है। पहाड़ी भूगोल में, गाँव दूर हैं। तिब्बती लोगों को आधुनिक सुविधाओं की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है।
लेकिन अब चीन तिब्बत में सुविधाओं का निर्माण करना चाहता है, जिसमें एक 1300 किमी लंबा एक्सप्रेसवे, एक और 1.5 लाख किमी का राजमार्ग शामिल है। चीनी सरकार की एक हालिया बैठक ने फैसला किया कि तिब्बत की संस्कृति को प्रभावित करने और लोगों को ब्रेनवॉश करने की परियोजनाएं तिब्बत पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लागू की जाएंगी। यह सिर्फ शुरुआत है।
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