
नई दिल्ली तारीख रविवार, 4 अप्रैल, 2021
यह एक तथ्य है कि भारत और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में हिंदू समुदाय सुरक्षित नहीं है। दोनों देशों में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के कारण यहां हिंदुओं की संख्या लगातार घट रही है। हिंदू अपनी जान बचाने के लिए इन सभी देशों के साथ भाग रहे हैं।
अब, सेंटर फॉर डेमोक्रेसी, बहुलवाद और मानवाधिकार ने दावा किया है कि अगर हिंदुओं ने इस तरह से भागना जारी रखा, तो 25 साल बाद बांग्लादेश में एक भी हिंदू नहीं बचा होगा। संगठन ने भारत के सात पड़ोसियों, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और तिब्बत में मानव अधिकारों पर एक रिपोर्ट तैयार की है।
बांग्लादेश में, पाकिस्तान की तरह, अल्पसंख्यकों की स्थिति खराब हो गई है। ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अब्दुल बरकत के नाम पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चार दशकों से हर साल 2.3 लाख लोग बांग्लादेश छोड़ रहे हैं। अगर यही दर जारी रही तो 25 साल बाद कोई हिंदू यहां नहीं रहेगा।
रिपोर्ट में पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ-साथ सिखों और ईसाइयों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए रहना युद्ध लड़ने से कम नहीं है। महिलाओं का अपहरण, बलात्कार और धर्मांतरण किया जा रहा है। आजादी के समय पाकिस्तान में हिंदू सिखों की आबादी लगभग 35 मिलियन थी। आज यह मुश्किल से 50 से 60 लाख है।
1970 में अफगानिस्तान में सात लाख हिंदू और सिख थे। आज बमुश्किल 200 हिंदू और सिख परिवार रह गए हैं। चीन ने तिब्बत में भी महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए हैं। मलेशिया में, हिंदुओं को मुसलमानों के समान अधिकार नहीं हैं।
इंडोनेशिया में भी पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक कट्टरता के बढ़ने के मद्देनजर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।
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