
वाशिंगटन, ता। २ ९
एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर साल दुनिया भर में 3 बिलियन टन बर्फ पिघल जाती है। पिछले 40 वर्षों में उपग्रह चित्रों के एक अध्ययन से पता चला है कि बर्फ प्रति वर्ष 21 प्रतिशत की दर से पिघल रही है। 15 साल पहले ऐसा नहीं था। अगर ऐसा होता, तो दुनिया का जलस्तर बढ़ जाता।
विज्ञान पत्रिका नेचर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर साल 4,6,250,000 किलोग्राम बर्फ पिघलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 2015 के बाद से हर साल दुनिया के 250,000 बर्फीले पहाड़ों से 3 बिलियन टन बर्फ पिघल गई है। 2000 से 2009 की तुलना में 2014 से 2015 के बीच औसतन 3 बिलियन टन बर्फ पिघली।
फ्रांस विश्वविद्यालय में ग्लेशियर के वैज्ञानिक रोमैन ह्यूगनेट के अनुसार, दुनिया की बर्फ, यदि कोई हो, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में सबसे अधिक पिघला है। अलास्का में कोलंबिया ग्लेशियर प्रति वर्ष लगभग 115 फीट पिघलता है। पिछले 30 वर्षों में बर्फ के पिघलने की दर में वृद्धि हुई है। बर्फ दो गुना तेजी से पिघल रही है।
वैज्ञानिकों ने पिछले 30 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन किया। वर्ष 2000 से उपग्रह चित्रों और वर्ष 2020 से उपग्रह चित्रों की तुलना की गई। रिपोर्ट के अनुसार तिब्बती ग्लेशियर, जो वर्षों से सुरक्षित हैं, भी तेजी से पिघल रहे हैं।
वर्ल्ड ग्लेशियर मॉनिटरिंग सर्विस के निदेशक माइकल जेप्पे के अनुसार, बर्फ इतनी बड़ी है कि अगर यह एक ही साल में अचानक पिघल जाए तो स्विट्जरलैंड 4 फीट पानी में डूब जाएगा। बर्फ के पिघलने के पीछे ग्लोबल वार्मिंग सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
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