ब्रिटेन में कोरोना-रक्षित नोजल स्प्रे का सफल परीक्षण किया गया




लंदन, ता। १०
ब्रिटेन और कनाडा के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से एक नोजल स्प्रे परियोजना शुरू की। इसे एक बड़ी सफलता माना जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि नोजल स्प्रे परीक्षण के परिणामस्वरूप 5% तक की वृद्धि हुई।
नोजल स्प्रे पर ब्रिटेन के सेंट पीटर हॉस्पिटल फाउंडेशन ट्रस्ट और कनाडाई बायोटेक कंपनी सेनोटाइज द्वारा संयुक्त परियोजना में शोध किया गया था। शोधकर्ताओं ने नाइट्रिक ऑक्साइड नोजल स्प्रे के साथ प्रयोगों में महत्वपूर्ण सफलता पाई है।
शोधकर्ताओं ने छह लोगों पर दूसरे चरण का परीक्षण किया, जिसमें 5% तक स्प्रे प्रभावी था। कोरोना संक्रमण का इलाज नोजल स्प्रे से किया गया था। अगले दो घंटों में वायरस 3% तक कमजोर पाया गया। इसके अलावा, वायरस को नाक में प्रवेश करने से रोकने के लिए स्प्रे को बहुत प्रभावी माना गया था।
राहत की बात यह भी थी कि ब्रिटेन में एक नए प्रकार का कोरोना फैल गया था। इसका छिड़काव भी किया गया था। शोधकर्ताओं ने छह लोगों पर प्रयोग किया, लेकिन 7,000 अन्य लोगों ने खुद स्प्रे का इस्तेमाल किया। वैज्ञानिकों ने यह भी दावा किया कि इनमें से कोई भी दुष्प्रभाव नहीं था।
डॉ स्टीफन विनचेस्टर ने कहा कि इस बात की प्रबल संभावना है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में यह दवा बहुत प्रभावी होगी। नोजल स्प्रे भी लेना बहुत आसान है। यह कोरोना को बनने से रोकता है और इसे कमजोर भी करता है। किसी भी तरह से यह स्प्रे लंबे समय में उपयोगी होगा।
उल्लेखनीय है कि भारत में नोजल स्प्रे के प्रयोग भी किए जा रहे हैं। भारत में नोजल स्प्रे शोध नैदानिक ​​परीक्षणों के स्तर तक पहुंच गया है।

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