
(PTI) नई दिल्ली, ता। ९
ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक दिलचस्प खोज प्रस्तुत की। ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष सूर्य के प्रकाश में कोरोना मृत्यु दर कम थी। कोरोना मृत्यु दर कम थी, खासकर पराबैंगनी किरणों के उच्च स्तर वाले क्षेत्रों में।
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जनवरी 2020 और अप्रैल 2020 के बीच रिपोर्ट किए गए मामलों को देखा। अध्ययन अमेरिका के 6 क्षेत्रों पर आयोजित किया गया था। कोरोना की मृत्यु उन क्षेत्रों में कम थी जहां सूरज की सीधी किरणें गिरती थीं। उन क्षेत्रों में मृत्यु दर अधिक थी जहां पराबैंगनी किरणें बहुत कम पाई जाती थीं।
शोधकर्ताओं ने इटली-ब्रिटेन-स्पेन जैसे देशों में विभिन्न क्षेत्रों से मौत के टोल और कोरोनरी संक्रमण के आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए एक ही पैटर्न का उपयोग किया, जहां कोरोना ने पिछले साल जनवरी और अप्रैल के बीच हंगामा किया था। उसी निष्कर्ष पर पहुंचा गया। जिन क्षेत्रों में पराबैंगनी किरणों को सीधे उजागर किया गया था, वहां मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम पाई गई।
रिपोर्ट का दावा है कि उच्च-पराबैंगनी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में कोरोना ने मृत्यु के जोखिम को 3% तक कम कर दिया है। यह पहली व्यवस्थित रिपोर्ट है जो साबित करती है कि कोरोना सूर्य के प्रकाश से संबंधित है।
उसी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पहले सूर्य के प्रकाश और रक्तचाप को दिल के दौरे से जोड़ा था। अधिक धूप वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दिल के दौरे और रक्तचाप का अपेक्षाकृत कम जोखिम था।
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