ग्लोबल वार्मिंग से अंटार्कटिका की बर्फ का एक तिहाई पिघलने की संभावना है



(PTI) नई दिल्ली, ता। ९
ग्लोबल वार्मिंग से अंटार्कटिका की एक तिहाई बर्फ पिघलने का डर जियोफिजिकल रिसर्च लेटर जर्नल में व्यक्त किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तापमान में तेजी से वृद्धि के कारण अंटार्कटिका की 9 प्रतिशत बर्फ पिघल जाएगी और समुद्र का स्तर बढ़ जाएगा।
दुनिया में तापमान औसतन चार डिग्री बढ़ जाएगा, जैसा कि वे औद्योगिक क्रांति से पहले थे, और अंटार्कटिका की बर्फ की चादर पिघलनी शुरू हो जाएगी। अंटार्कटिका की एक तिहाई बर्फ की चादर पिघल कर समुद्र में चली जाएगी। शोधकर्ताओं के अनुसार, अंदेशा है कि अंटार्कटिका का लगभग 4% पिघल जाएगा।
वैज्ञानिकों ने कहा कि अंटार्कटिका में लार्सन सी सबसे बड़ी जीवित बर्फ की चादरों में से एक है। यदि यह क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघल रहा है, तो यह अंटार्कटिका के एक बड़े हिस्से को पिघला देगा और समुद्र का स्तर बढ़ने का कारण होगा।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि औद्योगिक क्रांति से पहले वैश्विक तापमान में औसतन 1.5 से 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, तो अंटार्कटिका की बर्फ 15 से 18 प्रतिशत तक पिघल जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बड़े ग्लेशियर पर बर्फ के पिघलने से ग्लेशियर में दरारें पड़ जाती हैं। यह दरारों में बड़ी हो जाती है और अंततः एक दिन पिघल जाती है।
रिपोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए गंभीर कदम उठाए जाने चाहिए।

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