वाशिंगटन, रविवार 23 मई 2021
कोरोना महामारी ने मानव जीवन को काफी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही इसने दुनिया को वैचारिक बदलाव की सीख दी है। इसमें सबसे बड़ी सीख है दौलत में बदलाव।
हाल के कुछ सर्वेक्षणों के अनुसार, अमीरों ने भी महसूस किया है कि पैसे के साथ सब कुछ का आनंद लेने की संभावना बहुत सच नहीं है अमेरिका जैसे अमीर देश में भी, रिश्ते और स्वास्थ्य नाटकीय रूप से बदल गए हैं स्वास्थ्य है तो समृद्धि है। ऐसा वे मानने लगे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में निवेशकों के बोस्टन निजी सर्वेक्षण में, 60 प्रतिशत ने स्वीकार किया कि महामारी ने उन्हें धन के मुद्दे की अपनी समझ का पुनर्मूल्यांकन करने का मौका दिया था। लोग टैक्स और कई अन्य चीजों को लेकर चिंतित हैं लेकिन अब स्वास्थ्य देखभाल उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।
दूसरी ओर, चार्ल्स श्वाब कॉर्प के वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया कि मध्यम आय वाले लोग महामारी के मद्देनजर देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अधिक सकारात्मक हैं।
बोस्टन प्राइवेट के मंडल अध्यक्ष गेराल्ड बेकर ने कहा कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों के लिए अब धन का मतलब अधिक नकदी नहीं है। वे जो भी काम कर रहे हैं उसमें सफलता अब उनका गुरु मंत्र है। महामारी ने खुशी और सफलता को फिर से परिभाषित करने का अवसर प्रदान किया है।
इससे सहमत, 78% लोग मिलेनियल्स में, यानी 1980 और 1990 के दशक में पैदा हुए थे, जबकि 73% जनरेशन X में, यानी 1965 और 1980 के बीच पैदा हुए थे। समूह ने कहा कि कोरोना ने संपत्ति के भविष्य के उपयोग के लिए अपनी योजनाओं को बदल दिया है। हालांकि, 1946 और 1964 के बीच पैदा हुए लोगों में से केवल 26% ही इस पर सहमत हुए।
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