
वाशिंगटन, ता. 22
Amazon और Apple दुनिया के सबसे मूल्यवान ब्रांड हैं। हालांकि, ब्रांड से जुड़ी हालिया रैंकिंग के अनुसार, चीनी ब्रांड इस संबंध में आगे बढ़ना जारी रखते हैं। Kantar BrandZ की रैंकिंग के मुताबिक, चीनी ब्रांड वैल्यू के मामले में यूरोप के टॉप ब्रैंड्स को पीछे छोड़ चुके हैं।
19 वीं में जेफ बेजोस द्वारा स्थापित, अमेज़ॅन दुनिया का सबसे मूल्यवान ब्रांड बन रहा है। Amazon की ब्रांड वैल्यू 3 अरब आंकी गई है। Apple, जिसकी स्थापना 19 को हुई थी, की ब्रांड वैल्यू 215 बिलियन है।
गूगल इस लिस्ट में 3 अरब की वैल्यू के साथ तीसरे नंबर पर है। 100 कंपनियों की सूची में तीन भारतीय कंपनियों को भी शामिल किया गया है। टीसीएस चौथे स्थान पर, एचडीएफसी बैंक चौथे स्थान पर और एलआईसी चौथे स्थान पर है।
इस लिस्ट में चौथे नंबर पर माइक्रोसॉफ्ट, पांचवें नंबर पर चीन की वीडियो गेम और सोशल मीडिया कंपनी टेनसेंट, छठे नंबर पर फेसबुक, सातवें नंबर पर अलीबाबा, आठवें नंबर पर वीजा, नौवें नंबर पर मैकडॉनल्ड्स और दसवें नंबर पर मास्टरकार्ड शामिल है।
कैंटर ब्रांड्सजेड के निदेशक (वैश्विक रणनीति) ग्राहम स्टॉपलहर्स्ट ने कहा कि चीनी ब्रांड धीरे-धीरे लेकिन तेजी से आगे बढ़ रहा है। सूची के अनुसार, 2007 में बनी टेस्ला सबसे तेजी से बढ़ने वाली और सबसे मूल्यवान कार ब्रांड है।
सूची में अमेरिकी ब्रांडों का दबदबा है। 100 में से 9 ब्रांड अमेरिकी हैं। फ्रांस के लुई वुइटन 31वें और यूरोप के सबसे मूल्यवान ब्रांड हैं। सूची में ब्रिटेन का वोडाफोन सातवें स्थान पर है। सूची में यूरोपीय ब्रांडों की हिस्सेदारी एक दशक पहले के 20 प्रतिशत से घटकर 8 प्रतिशत रह गई है।
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