
संयुक्त राष्ट्र, ता. १३
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अनुसार, चीन अल्पसंख्यकों के अंगों को निकालकर उन्हें प्रताड़ित करता है और फिर उन्हें मरने के लिए मजबूर करता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्यों ने दावा किया है कि चीन में हिरासत में लिए गए अल्पसंख्यक नागरिकों को अमानवीय यातना दी जाती है। विशेष रूप से उइगर मुसलमानों, मुसलमानों, ईसाइयों और तिब्बतियों को आँख बंद करके हिरासत में लिया जा रहा है। इन नागरिकों को फिर रक्त परीक्षण के बहाने भर्ती कराया जाता है। फिर उनके दिल, लीवर और किडनी को निकाल दिया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया है: "हमें सूचना मिली है कि चीन में धार्मिक अल्पसंख्यकों को खून की रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया गया है। इसके बाद कई कैदियों के विभिन्न अंगों का एक्स-रे किया जाता है। केवल अल्पसंख्यक कैदियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है। अन्य कैदियों को ऐसी किसी भी जांच से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है।
अल्पसंख्यकों को अकारण ही जेल में डाल दिया जाता है। फिर कैदियों को निकाला जाता है और मार दिया जाता है। जब एक कैदी की मृत्यु हृदय और कलेजे को निकालने के बाद होती है, तो यह घोषणा की जाती है कि उसकी मृत्यु एक गंभीर बीमारी से हुई है। रैकेट में चीन के स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी और सर्जन शामिल थे।
मानवाधिकार आयोग ने कहा कि इस तरह की खबरें 2008-09 में पहले भी आ चुकी हैं। उस समय चीनी सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाया गया था, लेकिन सरकार ने इनकार किया कि ऐसा कोई डेटा उपलब्ध था। चीन से जांच में सहयोग करने को कहा गया है।
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