गांधीनगर, 31 मई 2021 सोमवार
अमेरिकी रक्षा विभाग ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में लापता हुए अपने 400 से अधिक सैनिकों के अवशेषों को खोजने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए उसने गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के साथ हाथ मिलाया है। NFSU विशेषज्ञ DPAA नामक एक अन्य संगठन की सहायता करेंगे, जो यू.एस. रक्षा विभाग के अधीन कार्य करता है। DPAA युद्ध के दौरान खोए और पकड़े गए सैनिकों के ठिकाने पर नज़र रखता है।
एनएफएसयू में डीपीएए के मिशन प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ गार्गी जानी ने कहा कि लापता अमेरिकी सैनिकों के अवशेषों का पता लगाने में हर संभव मदद की जाएगी।
गार्गी ने कहा कि एजेंसी की टीमें द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध, शीत युद्ध और इराक में खाड़ी युद्ध सहित पिछले अमेरिकी संघर्षों के दौरान लापता सैनिकों के अवशेषों का पता लगाने और उन्हें पुनः प्राप्त करने का प्रयास करेंगी।
द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और शीत युद्ध के दौरान, 81,800 अमेरिकी सैनिक लापता हो गए, जिनमें से 400 भारत में लापता हो गए। डॉ गार्गी ने कहा कि एनएफएसयू डीपीएए को वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टि से अपने काम में मदद करने की पूरी कोशिश करेगा।
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