
- विश्वविद्यालयों के इस आदेश के बाद छात्र 2 अलग-अलग टीके लेने की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं
नई दिल्ली तिथि। रविवार, 6 जून, 2021
कोरोना महामारी के दौरान अमेरिकी विश्वविद्यालयों की कोरोना टीकाकरण नीति ने भारत समेत सभी विदेशी छात्रों को संकट में डाल दिया है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने उन भारतीय छात्रों से कहा है जिन्हें भारत में कोवेक्सिन या स्पुतनिक-वी वैक्सीन का टीका लगाया गया है।
सभी अमेरिकी विश्वविद्यालय उन छात्रों के पुन: टीकाकरण का आह्वान कर रहे हैं, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया टीका प्राप्त हुआ है। इसमें भारतीय छात्र भी शामिल हैं जिन्होंने इंडिया बायोटेक का कोवेक्सिन या रूस का स्पुतनिक-वी वैक्सीन लिया है।
अमेरिकी विश्वविद्यालय इसका श्रेय वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा पर डेटा की कमी को देते हैं। शरद ऋतु में सेमेस्टर शुरू होने से पहले चिंतित छात्रों को पुन: टीकाकरण के लिए कहा जा रहा है।
विश्वविद्यालयों के इस आदेश के बाद छात्र 2 अलग-अलग टीके लेने की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। अमेरिकी सीडीसी के प्रवक्ता क्रिस्टन नोर्डलैंड ने कहा, "2 अलग-अलग टीकों को लेने की सुरक्षा और प्रभावकारिता का अध्ययन नहीं किया गया है क्योंकि कोविड -19 वैक्सीन विनिमेय नहीं है।"
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुमोदित कुछ टीकों में अमेरिकी दवा कंपनियों फाइजर इंक, मॉडर्न इंक और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा निर्मित टीके शामिल हैं।
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