
वाशिंगटन, ता. 29
वाशिंगटन में मुनरो स्काई वैली एजुकेशन सेंटर में काम करने वाले तीन शिक्षकों ने केमिकल कंपनी मोनसेंटो के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उस मामले में, किंग काउंटी सुपीरियर कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमें कंपनी को ₹ 127 मिलियन, या लगभग 1,200 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।
तीन शिक्षकों ने फ्लोरोसेंट रोशनी के माध्यम से एक घातक रसायन के संपर्क में आने से मस्तिष्क क्षति का दावा किया है। किंग काउंटी सुपीरियर कोर्ट में तीन शिक्षकों ने रासायनिक कंपनी पर मुकदमा दायर किया। अदालत ने तीन शिक्षकों के दावे को बरकरार रखा और कंपनी के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें शिक्षकों को 127 मिलियन, या लगभग 1,200 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया।
शिक्षकों ने अपने आवेदन में कहा कि वे शिक्षा केंद्र में फ्लोरोसेंट लाइट के जरिए पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल यानी पीसीबी के संपर्क में आए। पीसीबी का उपयोग कंपनी द्वारा बिजली के उपकरणों में शीतलक और स्नेहक के रूप में किया जाता था। इस तरह के रसायनों के उपयोग पर 19 तारीख से प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि कई कंपनियां स्कूलों, डे केयर सेंटरों आदि में इस्तेमाल होने वाली फ्लोरोसेंट रोशनी में पीसीबी का इस्तेमाल करती हैं।
शिक्षकों से लड़ने वाली एक कानूनी फर्म फ्राइडमैन रुबिन ने कहा कि किंग काउंटी सुपीरियर कोर्ट में एक जूरी ने कंपनी को शिक्षकों का पक्ष सुनने के बाद राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। यह ऐतिहासिक निर्णय प्रतिबंधित सामग्री को फ्लोरोसेंट रोशनी में उपयोग करने से प्रतिबंधित करेगा।
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