
नई दिल्ली, 6 जुलाई 2021, मंगलवार
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव दिनों दिन स्पष्ट होता जा रहा है। नवीनतम शोध के हिस्से के रूप में, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी पर हर साल 53, 000 वर्ग किलोमीटर बर्फ पिघल रही है। जिसके गंभीर परिणाम मनुष्य को स्वयं भुगतने होंगे।
वर्तमान में पृथ्वी पर मौजूद ताजे पानी में बर्फ के रूप में संग्रहित जल की मात्रा बहुत अधिक है। यदि बर्फीला क्षेत्र सिकुड़ रहा है तो यह पृथ्वी पर बढ़ते तापमान की ओर इशारा करता है। चीनी शोधकर्ता शियाओक्सिंग पैंग का कहना है कि बर्फीला क्षेत्र जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा संकेतक है और साथ ही यह दर्शाता है कि दुनिया बदल रही है।
पृथ्वी पर बर्फ से ढके क्षेत्रों के आकार में परिवर्तन एक बड़े वैश्विक परिवर्तन का प्रतीक है। हाल ही में जनवरी तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा कि साल 2020 दुनिया का सबसे गर्म साल रहा है। जिसका अर्थ है कि यह वर्ष का सबसे अधिक भ्रमित करने वाला समय भी होने वाला है। 1951 से 1980 तक औसत वैश्विक तापमान में एक डिग्री की वृद्धि हुई है।
चीन में शोधकर्ताओं ने बर्फ से ढके क्षेत्रों का अध्ययन करने के लिए उपग्रह आँकड़ों की मदद ली। शोधकर्ताओं का कहना है कि उत्तरी गोलार्ध की ज्यादातर बर्फ पिघल चुकी है। तेजी से पिघल रही बर्फ ने दुनिया की 40 फीसदी आबादी को प्रभावित किया है।
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