श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में चीनी सैनिकों ने खोदी मिट्टी


कोलंबो, 7 जुलाई 2021, सोमवार

चीन दुनिया में कर्ज के जाल में फंसी कूटनीति के लिए कुख्यात है। जिस तरह एक सूदखोर आदमी किसी जरूरतमंद को अपनी शर्तों पर उधार देता है और फिर कर्ज में डूब जाता है, उसी तरह चीन भी करता है। चीन अंततः विकासशील देशों को लालच देकर हावी हो जाता है जिनकी अर्थव्यवस्था छोटी है और जो विकसित होना चाहते हैं या अविकसित रहना चाहते हैं। एक सूत्र के मुताबिक चीन ने कर्ज जाल कूटनीति के तहत दुनिया के 20 से ज्यादा देशों को पैसा दिया है। कुछ द्वीप राष्ट्र, जैसे जिबूती, पर सकल घरेलू उत्पाद के 50 प्रतिशत से अधिक का ऋण है। पड़ोसी देश पाकिस्तान पर चीन का 20 अरब का बकाया है। यह राशि कभी भी पाकिस्तान द्वारा भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।


तो वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान को चीन के हाथों गुलाम बनाना पड़ेगा। पाकिस्तान की तरह श्रीलंका भी चीन के कर्ज में उतना ही उलझा हुआ है। हालांकि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से ज्यादा मजबूत है, लेकिन वह चीन की कर्ज जाल कूटनीति का शिकार हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन श्रीलंका के कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर को जब्त करने की प्रक्रिया में है। श्रीलंका में कुछ चीनी सैनिकों की हरकत इसका सबूत है। सेना की वर्दी पहने सैनिकों को हंबनटोटा द्वीप पर एक झील में मिट्टी खोदते देखा गया। हंबनबोटा की प्राचीन झील में कुछ लोगों के पास चीनी सैनिकों जैसी वर्दी थी।


श्रीलंकाई कानून उन लोगों को सेना की वर्दी पहनने से रोकता है जो सेना में सेवा नहीं करते हैं। इस नियम को तोड़ने वालों को गिरफ्तार करने और सजा देने का भी प्रावधान है, हालांकि चीन किसी पर विश्वास नहीं करता है। श्रीलंका ने चीनी हस्तक्षेप का विरोध किया, लेकिन श्रीलंका में चीनी दूतावास ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि इस तरह के कपड़े पहनना आम बात है।

यह किसी चीनी सैनिक की हरकत नहीं है। यह याद किया जा सकता है कि श्रीलंका ने अपने ऋण चुकौती के हिस्से के रूप में चीन को हंबनटोटा का बंदरगाह दिया था। कोलंबो पोर्ट सिटी परियोजना को भी पांच साल के पट्टे पर ले लिया गया है। पाकिस्तान ऐतिहासिक विभाजन के बाद से भारत विरोधी रहा है, लेकिन चीन नेपाल के बाद बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे भारत के पड़ोसियों पर कर्ज जाल कूटनीति थोपने की कोशिश कर रहा है।


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