ग्लोबल वार्मिंग का असर, ग्रीनलैंड में एक ही दिन में 850 मिलियन टन बर्फ पिघली

नई दिल्ली, दिनांक 3 अगस्त 2021, मंगलवार

ग्लोबल वार्मिंग का असर अब बर्फ से ढके ग्रीनलैंड में महसूस किया जा रहा है।

27 जुलाई को ग्रीनलैंड के उत्तरी भाग में बड़े पैमाने पर बर्फ पिघली, जिससे औसत गर्मी का तापमान दोगुना हो गया और पारा 20 डिग्री तक पहुंच गया। यह तापमान ग्रीनलैंड के बर्फीले इलाके के लिए काफी अधिक है।

27 जुलाई को ग्रीनलैंड में 850 मिलियन टन बर्फ पिघली थी। इस बर्फ के पिघलने के बाद जितना पानी बना है, वह यूपी जैसे बड़े राज्य को डूबने के लिए काफी है। ग्रीनलैंड ने इससे पहले 2019 में रिकॉर्ड 1250 टन बर्फ को पिघलाया था।

जैसे-जैसे ऊपरी सतह से बर्फ पिघल रही है, निचली सतह से बर्फ ऊपर आ रही है। जो सूर्य की किरणों को वापस फेंकने के बजाय अवशोषित कर लेता है। इससे स्थिति और चिंताजनक हो रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पिछले कुछ दशकों में ग्रीनलैंड की पिघली हुई बर्फ ने दुनिया के समुद्र के स्तर में 25 प्रतिशत वृद्धि का योगदान दिया है। यदि ग्रीनलैंड की सारी बर्फ पिघल जाती है, तो वैश्विक समुद्र का स्तर 20 फीट तक बढ़ सकता है।

ग्रीनलैंड में अंटार्कटिका के बाद सबसे अधिक मीठे पानी की बर्फ है। इसका क्षेत्रफल 18 लाख वर्ग किलोमीटर है। यहां की बर्फ पिघलने की शुरुआत 1990 में हुई थी। हालांकि अब बर्फ पहले की तुलना में चार गुना तेजी से पिघल रही है।

जून में बर्फ पिघलने लगती है। इस साल जून से अब तक 10,000 मिलियन टन बर्फ पिघल चुकी है।

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