
नई दिल्ली, दिनांक 20 अगस्त 2021, शुक्रवार
तालिबान को दुनिया के कई देशों में मान्यता नहीं है और तालिबान के वित्तीय स्रोत को भी अवरुद्ध किया जा रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफगान सेंट्रल बैंक से ९९५० मिलियन की संपत्ति जब्त की है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी अफगानिस्तान में नकदी प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया है।
ऐसे में यह अफगानिस्तान के लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने वाला है, महंगाई भी बढ़ेगी। हालांकि सवाल यह भी उठता है कि तालिबान को सरकार चलाने के लिए पैसा कहां से मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान के पास आय के अन्य स्रोत हैं।
जून 2021 में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान की वार्षिक आय 1. 1.6 बिलियन थी। तालिबान को अपना मुनाफा मादक पदार्थों की तस्करी, अफीम की खेती, अपहरण और खनिज संसाधनों की अवैध बिक्री से प्राप्त होता है। इसके अलावा तालिबान के कई मददगार भी हैं।
हालाँकि, अब जब देश कब्जे में है, तालिबान पूरे देश से कर एकत्र कर सकता है। तालिबान सीमा पार व्यापार पर कर लगाकर भी पैसा कमा सकता है। इसके अलावा यह बैंकों और अन्य संस्थानों पर भी नियंत्रण स्थापित करेगा। तालिबान अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर हवाला नेटवर्क पर भी टैक्स लगा सकता है। अगर अफीम के व्यापार को वैध कर दिया जाता है तो तालिबान भारी मुनाफा कमा सकता है।
तालिबान अब अफगानिस्तान में 704 खनन क्षेत्रों को नियंत्रित करता है। यहां की रेयर अर्थ मेटल पर चीन की नजर है। अफगान सरकार की 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में खनन किए गए खनिजों का मूल्य 3 ट्रिलियन अनुमानित है। जिसे तालिबान दूसरे देशों को बेचकर भारी मुनाफा कमा सकता था। हालांकि, खनिज उत्खनन सुविधाओं के निर्माण में वर्षों लगेंगे। इसलिए तालिबान को इस विकल्प से तुरंत कोई फायदा नहीं होता।
इसके अलावा तालिबान को बिना किसी प्रयास के लाखों डॉलर मूल्य के हथियार और उपकरण मिले हैं। उसे बेचकर भी पैसा मिल सकता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें