
नई दिल्ली, दिनांक 3 अगस्त 2021, मंगलवार
लद्दाख मोर्चे पर तनावपूर्ण चीन को चुनौती देने के लिए भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में चार युद्धपोत भेजकर अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया है।
भारतीय नौसेना के युद्धपोत दक्षिण चीन सागर और दक्षिण पूर्व एशिया में दो महीने तक रहेंगे। भारतीय जहाजों को वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस के युद्धपोतों के साथ युद्धपोतों का संचालन करना है। इन सभी देशों के साथ चीन का दक्षिण चीन सागर में विवाद है।
भारत द्वारा भेजे जाने वाले युद्धपोतों में निर्देशित मिसाइल विध्वंसक, निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट, पनडुब्बी रोधी जहाज भी शामिल हैं। जहाज ऐसे समय में दक्षिण चीन सागर की ओर बढ़ रहे हैं जब चीन पर ताइवान पर हमले का खतरा मंडरा रहा है।
चीन के आक्रामक रुख ने दक्षिण चीन सागर में उसके पड़ोसियों को परेशान कर दिया है। इसी वजह से दक्षिण चीन सागर में विभिन्न देशों की नौसैनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पिछले हफ्ते ही, एक ब्रिटिश विमानवाहक पोत इस क्षेत्र से गुजरा। चीनी नौसेना यहां समय-समय पर पढ़ाई करती है। चीन का दावा है कि दक्षिण चीन सागर पर हमारा अधिकार है। उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में यहां कृत्रिम द्वीप भी बनाए हैं। जहां भारी हथियारों और विमानों को भी तैनात किया गया है।
जानकारों का मानना है कि भारतीय युद्धपोत भले ही दक्षिण चीन सागर में विवादित द्वीपों से दूर रहें, लेकिन क्षेत्र में भारतीय युद्धपोतों का प्रवेश चीन को संदेश देने के लिए काफी है।
वहीं, भारत के इस कदम से चीन के भड़कने की संभावना है।
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