काबुल, शनिवार 21 अगस्त 2021
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान ने भी अपनी रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान अब 'नए' अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए काम करेगा। साथ ही वह सीमा पर अफगान गृहयुद्ध को खत्म करने की कोशिश करेगा। क्योंकि यह गृहयुद्ध पाकिस्तान के लिए अफ़ग़ान धरती पर अपना प्रभाव बढ़ाने में बाधक होगा।
पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में अफगानिस्तान-तालिबान को वित्तीय योगदान बढ़ा है। तालिबान खुलेआम पाकिस्तानी बाजारों में घूम रहे हैं। तालिबान आतंकवादी पाकिस्तान में स्थानीय दुकानदारों से 50 से अधिक की मांग कर रहे हैं।
इस बीच अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का स्वागत करने वाला ईरान भी अफगानिस्तान के हालात को लेकर चिंतित है। ईरान अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। इसलिए वह यहां की नई तालिबान सरकार के साथ भी सहयोग करना चाहेगा। हालांकि, ईरान तालिबान इस्लामिक अमीरात के निर्माण का विरोध करता है। तालिबान नई सीमाओं पर कब्जा करना जारी रखेगा।
उल्लेखनीय है कि फिर सक्रिय हुए उत्तरी गठबंधन ने तालिबान विरोधी ताकतों को तैनात करना शुरू कर दिया है।
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