
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना को अफ्रीकी देशों ने कड़ी टक्कर दी है। कई अफ्रीकी देशों ने चीनी कंपनियों के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए इस परियोजना को रद्द कर दिया है। अफ्रीकी देशों ने लंबे समय से महसूस किया है कि चीन उधार देकर गुलाम बनाना चाहता है।
चीन ने वन बेल्ट वन रोड यानी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट के नाम पर क्षेत्रवाद की नीति लागू की है। अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों को कर्ज देकर चीन उन देशों में निर्माण कर रहा है, लेकिन अब चीन की साजिश कई देशों को समझ में आने लगी है।
अफ्रीकी देशों ने खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए इस परियोजना को बंद कर दिया है। अफ्रीकी देश घाना ने हाल ही में बीजिंग ट्रैफिक एंड लाइटिंग टेक कंपनी का अनुबंध रद्द कर दिया। इससे पहले कांगो ने भी खनन परियोजना को रोक दिया था। केन्या ने मात्र 4.5 बिलियन का सौदा रद्द कर दिया।
चीन ने अकेले 2020 में अफ्रीकी देशों में 6,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसी बहाने चीन अफ्रीकी देशों में घुसपैठ करना चाहता है। चीनी कंपनियां इन देशों में खनिज, तेल, गैस आदि के क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। चीनी कंपनियों ने नाइजीरिया को 3 अरब रुपये की फंडिंग प्रदान की है।
लेकिन अब अफ्रीकी देश धीरे-धीरे इस बात को महसूस कर रहे हैं कि चीन उन्हें मोटी रकम देकर गुलाम बनाना चाहता है। इसके बाद वह अपनी जमीन का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करेगा। इसलिए चीनी परियोजनाओं को रद्द किया जा रहा है।
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