आंग सान सू की के जीवन का कालक्रम



म्यांमार की एक अदालत ने आंग सान सू की को चार साल जेल की सजा सुनाई है। वह अब अगले चुनाव में नहीं चल पाएंगे। आठ वर्षीय आंग सान सू की को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनका जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है।
- आंग सान सू की 19 तारीख को विदेश से म्यांमार लौटीं। यह पहली बार था जब उन्होंने लोकतंत्र के लिए एक प्रदर्शन में भाग लिया था।
- सू की को 19 में जेल में रखा गया था। वह 15 साल तक हिरासत में रहा। इस बीच वह म्यांमार में लोकतंत्र के मूल्यों के लिए लड़ते रहे हैं।
- 191 में नोबेल समिति ने शांति के लिए उनके अथक प्रयासों को मान्यता देने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया।
- सू ची की टीम पर 2007 में एक राजनीतिक दौरे के दौरान हमला हुआ था, जिसमें उनके समर्थक मारे गए थे।
- म्यांमार में लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा आंदोलन 2006 में शुरू हुआ था।
- आंग सान सू की 2010 में जेल से रिहा हुई हैं
- 2014 में सू की की पार्टी ने पहली बार चुनाव में एक सीट जीती थी।
- 2012 में हुए चुनाव में उनकी पार्टी विजेता बनी और उनके हाथ में देश की कमान आ गई।
- 2014 में म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का संकट। सैन्य कार्रवाई ने रोहिंग्या को देश से भागने के लिए मजबूर कर दिया। इस मुद्दे पर उनकी और उनकी पार्टी की काफी आलोचना हुई थी।
- 2020 में दोबारा चुनाव हुए और उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया।
- फरवरी 2021 में संसदीय सत्र होने से पहले सैन्य तख्तापलट हो गया और उनके सहित पार्टी के अधिकांश नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
6 दिसंबर 1991 को म्यांमार की एक अदालत ने आंग सान सू की को चार साल जेल की सजा सुनाई थी। इस सजा के चलते वे अगले चुनाव में नहीं चल पाएंगे।

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