ऑस्ट्रेलिया में लाखों मधुमक्खियों को मारने का आदेश क्यों दिया जाता है? जानिए, एक कीटनाशक ने मचाई तबाही


सिडनी, 30 जून, 2022, गुरुवार

ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों में एक खतरनाक कीटनाशक पाया गया है। इसके घातक प्रभावों से बचने के लिए करोड़ों मधुमक्खियों को मारने का आदेश दिया गया है। मधुमक्खी के छत्ते को जलाकर, पेट्रोल या गैस का उपयोग करके मारा जा रहा है।दुनिया में मधुमक्खी के नाम से जानी जाने वाली मधुमक्खियों की संख्या में कमी आ रही है। इसके पालन-पोषण और प्रजनन की तत्काल आवश्यकता है।

मधुमक्खियां न केवल शहद के लिए बल्कि परागण के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। ऐसे समय में कीटनाशी मधुमक्खियों का समय बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अगर संक्रमित मधुमक्खियों को नष्ट नहीं किया गया तो सभी मधुमक्खियों के लिए खतरा है। सिडनी के पास एक बंदरगाह के पास वारोआ डिस्ट्रॉयर नाम का कीटनाशक मिला। यह कीटनाशक मिलने के दो हफ्ते बाद ही 100 किमी दूर मधुमक्खियों के छत्ते में मिला था।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि वरोआ इतना खतरनाक है कि यह न केवल शहद के लिए बल्कि मधुमक्खी पालन और उत्पादन के लिए भी खतरनाक है। इस तरह की आशंकाओं के कारण ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों के लिए तालाबंदी कर दी गई, जो मधुमक्खी पालन के लिए जानी जाती है। मधुमक्खी पालकों को निर्देश दिया गया है कि वे मधुमक्खियों को संक्रमित न करें। मधुमक्खी पालन ऑस्ट्रेलिया में कई मिलियन डॉलर का व्यवसाय है। यदि यह एक कीटनाशक के कारण बर्बाद हो जाता है, तो मधुमक्खी उत्पादन को भारी नुकसान होगा।

एक अनुमान के मुताबिक, अगर कीटनाशक फैलाया जाए तो मधुमक्खी पालन पर 80 मिलियन तक का खर्च आ सकता है। हालांकि यह कीटनाशक कोई नई बात नहीं है, लेकिन दुनिया में मधुमक्खी पालन से जुड़े लोग इसे सबसे घातक मानते हैं लेकिन ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप ही एकमात्र ऐसा महाद्वीप था जो अब तक इस बीमारी से प्रभावित नहीं हुआ है। एशिया, यूरोप और अमेरिका को नुकसान हुआ है। अब ऑस्ट्रेलियाई मधुमक्खियां कोई अपवाद नहीं हैं।


यह कीटनाशक दो प्रकार का होता है। एक है वरोआ विध्वंसक और दूसरी है वरोआ जैकबसोनी। ये दोनों कीटनाशक मधुमक्खियों का खून चूसते हैं और पल भर में कॉलोनियों को साफ कर देते हैं। यह वायरस मधुमक्खियों को पंगु बना देता है और नवजात मधुमक्खियों को कमजोर कर देता है। ऑस्ट्रेलियाई कृषि मंत्री डगलैंड साउंडर्स के अनुसार, अब तक 600 से अधिक मधुमक्खियों को नष्ट कर दिया गया है। एक छत्ते में 10 से 30 हजार संक्रमित मक्खियां थीं। अभी भी संक्रमित मक्खियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

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