
कोलंबो, दिनांक 11
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अत्याधुनिक चीनी शोध पोत जिसे गुरुवार को श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर डॉक करना था, वह अपने कार्यक्रम के अनुसार श्रीलंकाई बंदरगाह पर नहीं पहुंचा। भारत ने इस कथित चीनी जासूसी जहाज की इस द्वीपीय राष्ट्र में मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी और सुरक्षा मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। उसके बाद श्रीलंका ने जहाज को बंदरगाह पर आने से रोक दिया।
हंबनटोटा पोर्ट के हार्बर मास्टर ने कहा, कोई भी जहाज उनकी अनुमति के बिना बंदरगाह पर लंगर नहीं डाल सकता है। चीन का बैलिस्टिक मिसाइल और सैटेलाइट ट्रैकिंग शिप 'युआन वांग-5' गुरुवार को हंबनटोटा बंदरगाह नहीं पहुंचा। पिछले हफ्ते श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने बीजिंग से 'युआन वांग-5' के आगमन को स्थगित करने को कहा था। यह हजार 11 से 17 अगस्त के बीच हंबनटोटा बंदरगाह पर लंगर डालना था। हालांकि, भारत ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए जहाज के श्रीलंका पहुंचने पर चिंता जताई थी।
एक रिपोर्ट के अनुसार युआन वांग-5 पोत श्रीलंकाई जलक्षेत्र में हंबनटोटा बंदरगाह से 600 समुद्री मील दूर था। माना जाता है कि यह जहाज अब श्रीलंका के पूर्व में बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, इस बात की कोई घोषणा नहीं हुई है कि जहाज हंबनटोटा बंदरगाह में प्रवेश करेगा या नहीं। युआन वांग -5 जहाज 14 जुलाई को चीन से रवाना हुआ और अभी तक रास्ते में किसी भी बंदरगाह में प्रवेश नहीं किया है। माना जाता है कि जहाज बिना किसी रुकावट या बंदरगाह पर लंगर डाले 28 दिनों तक लगातार नौकायन कर सकता है। श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह एक गहरे समुद्र का बंदरगाह है और अपने स्थान के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
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