न्यूजीलैंड में मवेशियों पर बर्प टैक्स क्या है? चरवाहे विरोध कर रहे हैं


वेलिंगटन, 20 अक्टूबर 2022, गुरुवार

न्यूजीलैंड डेयरी उत्पादों में अग्रणी देश है। पशुपालन व्यवसाय में शामिल मवेशी प्रजनकों ने न्यूजीलैंड सरकार ने डेयरी मवेशियों विशेषकर गायों पर डकैती कर लगाया है। बेलचिंग टैक्स और कुछ नहीं बल्कि खाना खाने के बाद हवा के रूप में पेट से निकलने वाली गैस को बाहर निकालने पर लगने वाला टैक्स है, जिसे डकार कहा जाता है वह एक प्राकृतिक प्रक्रिया कैसे हो सकती है?

यही कारण है कि पशुपालक इस टैक्स का विरोध करने के लिए मैदान में उतर आए हैं। ग्राउंडस्वेल समेत करीब 25 छोटे शहरों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। हालांकि, निकट भविष्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की संभावना है। इसलिए डकार टैक्स के बारे में जानना जरूरी है।


दुनिया में ग्रीनहाउस उत्सर्जन में वृद्धि के कारण जलवायु परिवर्तन हो रहा है। उसके लिए सबसे खतरनाक मानी जाने वाली मिथेन गैस जानवरों के डकार में होती है। एक जानकारी के अनुसार दुनिया में पैदा होने वाली मीथेन गैस का 18 फीसदी डेयरी मवेशियों का है। एक जानवर अपना भोजन पचाने के बाद प्रति वर्ष 35 से 40 किलोग्राम मीथेन को बाहर निकालता है। इसलिए पालतू जानवर भी ग्रीन हाउस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।

अब बात करते हैं न्यूज़ीलैंड की, देश की मानव जनसंख्या लगभग 5 मिलियन है जो अहमदाबाद की कुल जनसंख्या से भी कम है। इसकी तुलना में गाय-भैंस जैसे दुधारू पशुओं की संख्या करीब 2.60 करोड़ है। दुग्ध उत्पादन और डेयरी उत्पादों में न्यूजीलैंड अग्रणी है। इतनी बड़ी संख्या में जंतुओं के माध्यम से उनके माध्यम से वातावरण में मीथेन गैस डाली जाती है, जो ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार है।

न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने 2050 तक देश को कार्बन मुक्त बनाने की घोषणा की है। चूंकि 2030 तक जानवरों के डकार से मीथेन उत्सर्जन को 10 प्रतिशत और 2050 तक 47 प्रतिशत कम करने का निर्णय लिया गया है, इसलिए पशु डकार कर लगाया गया है।

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