
वाशिंगटन, 16 नवंबर 2022, बुधवार
पिछले कुछ वर्षों में हो रहे परिवर्तन मानव जाति के लिए खतरनाक हो गए हैं। एक स्टडी के मुताबिक 40 साल की उम्र के दौरान पुरुषों के स्पर्म काउंट में 50 फीसदी की कमी आई है। हालाँकि, यह अध्ययन 2017 के एक अध्ययन का अद्यतन संस्करण है जिसका नेतृत्व इज़राइली महामारी विज्ञानी हागई लाविन ने किया था।
उस वक्त ये स्टडी सिर्फ नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लोगों पर की गई थी। अब एक नए अध्ययन में 53 देशों के 57000 हजार पुरुषों पर 243 तरह के शोधों की जांच के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके साथ ही प्रजोतपति से संबंधित शोध में यह अब तक का सबसे बड़ा शोध बन गया है। जिसमें पाया गया है कि पिछले 4 दशकों में शुक्राणुओं की संख्या घटकर आधी रह गई है।

अध्ययन ने यह भी स्पष्ट किया कि इसमें ऐसे पुरुष शामिल नहीं थे जो पहले से ही नपुंसक थे। अध्ययन के अनुसार प्रति मिलीलीटर वीर्य में 10.12 करोड़ शुक्राणुओं की जगह केवल 4.9 करोड़ शुक्राणु मौजूद थे। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्पर्म काउंट ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि स्पर्म की गतिशीलता भी फर्टिलिटी को प्रभावित करती है।
हालाँकि, इस अध्ययन में गतिशीलता पर प्रकाश नहीं डाला गया है। स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय में प्रजनन चिकित्सा विशेषज्ञ मार्टिस दा सिल्वा का मानना है कि पिछले दो दशकों में शुक्राणुओं की संख्या में नाटकीय रूप से गिरावट आई है। जर्नल ह्यूमन प्रोडक्शन अपडेट में प्रकाशित विवरण के अनुसार, 21वीं सदी के बाद से कम शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। स्पर्म काउंट हर साल 1.1 फीसदी घट रहा है।
पुरुष प्रजनन क्षमता और स्वास्थ्य के लिए बाधाओं के बारे में सोचने की तत्काल आवश्यकता है। स्पर्म काउंट कम क्यों हो रहा है इसको लेकर विशेषज्ञों में मतभेद है। वर्तमान में प्रदूषण, प्लास्टिक, धूम्रपान, ड्रग्स, खराब पोषण और मोटापे को दोष दिया जा रहा है।
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