दुनिया के लिए बोझ बनी चीन की कोविड वैक्सीन: ड्रैगन की वैक्सीन बेअसर साबित हो रही है

नई दिल्ली, 9 दिसंबर 2022, शुक्रवार

चीन की बनाई कोरोना वैक्सीन सिर्फ चीन ही नहीं दुनिया के कई देशों के लिए बोझ साबित हो रही है. कोरोना के दौरान चीन ने मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलाकर अपनी ही सिनोवैक वैक्सीन का प्रचार किया। लेकिन यह फिलहाल कोरोना के खिलाफ बेअसर साबित हो रहा है जिससे पूरी दुनिया के लोगों के लिए एक समस्या खड़ी हो गई है.

शोध के मुताबिक, एमआरएनए वैक्सीन शरीर की कोशिकाओं को सिखाती है कि एंटीबॉडी बनाने में मदद करने वाले प्रोटीन कैसे बनाए जाते हैं। लेकिन चीनी टीका निर्माता टी-सेल टीके बना रहे थे जो घातक वायरस से बचाव करने में असमर्थ थे। तुर्की जैसे देश ने भी चीन की वैसी ही वैक्‍सीन का इस्‍तेमाल किया था लेकिन चीन की नकली वैक्‍सीन का पता चलते ही उसने इसका इस्‍तेमाल बंद कर दिया। इंडोनेशिया के साथ ही थाईलैंड ने भी चीनी टीकों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। मलेशिया ने भी बाद में घोषणा की है कि वे चीनी वैक्सीन की जगह फाइजर की वैक्सीन का इस्तेमाल करेंगे।

चीन ने अपनी वैक्सीन का प्रसार बढ़ाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर की। लेकिन जैसे-जैसे उनके ही देश में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई और उनकी खुद की वैक्सीन काम नहीं कर रही थी, उनकी पोल खुल गई. जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी छवि खराब हुई है।

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