संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने महिलाओं की शिक्षा पर तालिबान के प्रतिबंधों की निंदा करते हुए बयान जारी किया

- तालिबान ने महिलाओं को शिक्षा से वंचित करने का फरमान जारी किया
- हम अफगानिस्तान के लोगों के अधिकारों के लिए खड़े रहेंगे: अमेरिका
- संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी चिंता जताई
नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2022, मंगलवार
अमेरिका ने अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के तालिबान के फैसले की निंदा की है। व्हाइट हाउस एनएससी की प्रवक्ता एड्रिएन वाटसन ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका अफगान महिलाओं को विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने से रोकने के तालिबान के अक्षम्य निर्णय की निंदा करता है। उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने और उन्हें अपने मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता का प्रयोग करने से रोकने के लिए तालिबान नेतृत्व का यह सबसे निंदनीय कार्य है। वॉटसन ने कहा कि अफगानिस्तान की आधी आबादी को पीछे रखने के इस अस्वीकार्य दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप, तालिबान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और अलग-थलग पड़ जाएगा और अपनी इच्छा की वैधता से वंचित हो जाएगा।
वॉटसन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर अपने साझेदारों और सहयोगियों के साथ निकट संपर्क में है। हम अफगान महिलाओं और लड़कियों का समर्थन करने के लिए कदम उठाना जारी रखेंगे और अफगानिस्तान के लोगों को मजबूत मानवीय सहायता प्रदान करने के हमारे साझा प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे। साथ ही तालिबान ने महिलाओं को दंडमुक्त करने के लिए एक पत्र जारी किया। इस पत्र में उच्च शिक्षा मंत्रालय ने अगली सूचना तक अफगानिस्तान में छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा पर रोक लगाने का आदेश दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और ऐसी नीतियां लागू कीं जो बुनियादी अधिकारों को गंभीर रूप से प्रतिबंधित करती हैं, खासकर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ। महिलाओं और लड़कियों के अकेले कहीं भी जाने पर भी पाबंदी है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी इस मसले पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा से वंचित करना न केवल महिलाओं और लड़कियों के समान अधिकारों का उल्लंघन करता है। लेकिन, इसका देश के भविष्य पर विनाशकारी प्रभाव भी पड़ेगा।
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