अफगानिस्तान में लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय बंद, शिक्षक चोरी-छिपे पढ़ाते हैं ऑनलाइन


- अफगान लड़कियों ने कहा- तालिबान का हमारे लिए एक ही काम बचा है- बच्चे पैदा करना और पालना।

नई दिल्ली, दिनांक 5 जनवरी 2023, गुरुवार

तालिबान सरकार के एक फैसले ने हजारों लड़कियों की पढ़ाई रोक दी है। सरकार ने 21 दिसंबर 2022 को लड़कियों के यूनिवर्सिटी जाने पर रोक लगा दी थी। उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम ने इसके लिए सभी निजी व सरकारी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। अगले दिन यानी 22 दिसंबर को एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि लड़कियां ड्रेस कोड फॉलो नहीं करती हैं। उसने ऐसे कपड़े पहने थे जैसे वह किसी शादी में जा रही हो।

व्हाट्सएप पर पढ़ाने लगे, प्रोफाइल में फोटो नहीं लगाने की हिदायत दी

अफगानिस्तान में कार्यकर्ता और शिक्षक यह सुनिश्चित करने के लिए नए तरीके ईजाद कर रहे हैं कि लड़कियों की शिक्षा बंद न हो। काबुल यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर हसीबुल्ला तरीन ने लड़कियों के लिए ऑनलाइन क्लास शुरू की है। व्हाट्सएप क्लासेज के जरिए भी पढ़ा रहे हैं।

तरीन का कहना है कि लड़कियों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। इसलिए हमने व्हाट्सएप पर हर लड़की का नाम और सरनेम बदल दिया है। हम उसकी पहचान छिपाते हैं। उन्हें अपने प्रोफाइल पर फोटो पोस्ट नहीं करने को कहा गया है। लड़कियां भी सुरक्षित रहने के लिए हर जरिया अपना रही हैं।

ऑनलाइन क्लास पढ़ने का एक मात्र तरीका

शादलिन नूरजई कानून और राजनीति की छात्रा हैं। वह प्रो. हसीबुल्लाह तरीन की क्लास ले रहे हैं। काबुल की एक निजी यूनिवर्सिटी के तीसरे सेमेस्टर में पढ़ने वाली शादलीन कहती हैं- 'तालिबान के फैसले के बाद हमारा जीवन संतुलित हो गया है. पढ़ाई जारी रखने का एकमात्र तरीका ऑनलाइन क्लासेज है। प्रो हसीबुल्लाह तरीन राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। उनकी कक्षा मेरे लिए अपनी पढ़ाई जारी रखने का एक अच्छा अवसर है।

शादलिन ऑनलाइन क्लासेस में पीस एंड कंफ्लिक्ट रेजोल्यूशन, ह्यूमन राइट्स और इंग्लिश की पढ़ाई कर रही हैं। वो कहते हैं- 'अफगानिस्तान हमेशा युद्ध का शिकार रहा है. लोगों को युद्ध से बाहर निकलने के लिए जानकारी की जरूरत है। शांति और संघर्ष समाधान का अध्ययन करते समय हम संघर्ष और युद्ध के कारणों को समझते हैं और उन्हें समाप्त करने के बारे में सोचने लगते हैं।

कुरान की एक आयत में है- इकरा का मतलब होता है पढ़ना। शिक्षा मेरे लिए, मेरे जैसी लड़कियों के लिए और सभी के लिए महत्वपूर्ण है। कोई नहीं कह रहा कि पढ़ाई की जरूरत नहीं है, लेकिन तालिबान हमारी पढ़ाई रोक रहा है। मेरे घर में कोई नहीं पढ़ता है तो परिवार को लगा कि बेटी को पढ़ाना जरूरी है। मुझे विश्वविद्यालय में लाने के लिए परिवार को बहुत संघर्ष करना पड़ा। अफगानिस्तान की महिलाओं के सामने और भी कई मुश्किलें हैं। शिक्षा ही उन्हें इस स्थिति से बाहर निकलने में मदद कर सकती है। तालिबान नहीं चाहता कि हम शिक्षित हों, क्योंकि यदि हम शिक्षित होंगे तो वे प्रश्न पूछेंगे। इसीलिए तालिबान ने हमें भविष्य से जोड़ने वाले पुल को नष्ट कर दिया है।

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