
न्यूयॉर्क, 19 जनवरी, 2023, गुरुवार
क्रिकेट को लाखों लोग प्यार करते हैं, लेकिन यह न्यू पापुआ गिनी में ट्रोबिएंड आदिवासी लोगों के लिए विवादों और विवादों को सुलझाने का एक साधन भी है। सोलोमन सागर के पास स्थित इस द्वीप में क्रिकेट मैच हारने वाली टीम को विजेता टीम माना जाता है। इस प्रकार क्रिकेट उनके लिए मनोरंजन नहीं अपितु मतभेद और पूर्वाग्रहों को दूर करने का साधन है। दो गांवों या बस्तियों के विवाद भी इस तरह से टीम बनाकर सुलझाए जाते हैं।
इस अनोखे क्रिकेट मैच में सीटी, डांस और गाना भी होता है। महिलाएं भी घास और फूलों से बनी फ्रॉक पहनकर इस क्रिकेट में भाग लेती हैं। यह परंपरा आधुनिक नहीं है बल्कि उतनी ही पुरानी है जितनी कि आधुनिक क्रिकेट का इतिहास। 20वीं सदी की शुरुआत में, ब्रिटिश मिशनरी रेवरेंड गिलमोर ने क्रिकेट सिखाया। जब रेवरेंड इस क्षेत्र में आए, तो लोग बहुत लड़ रहे थे और उन्हें क्रिकेट खेलना सिखा रहे थे।

ये आदिवासी लोग क्रिकेट खेलने की अपनी अनूठी शैली के साथ खेल के बुनियादी नियमों का भी पालन करते हैं।1973 में मानवविज्ञानी जेरी लीच के मार्गदर्शन में ट्रोबिएंड क्रिकेट नामक एक वृत्तचित्र भी बनाया गया था। 1793 में इस द्वीप का नाम इसके खोजकर्ता डेनिस डी ट्रोबिएंड के नाम पर रखा गया था। फ्रांसीसी दशकों तक इस क्षेत्र पर हावी रहे, जबकि क्रिकेट का आखिरी खेल ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था।
ट्रोब्रिएंड द्वीप समूह के लोग बाहरी दुनिया से बहुत कम संपर्क के साथ अकेले रहते हैं। वे सूखे केले के पत्तों को अपनी मुद्रा मानते हैं और वित्तीय लेन-देन करते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक केले के 50 पत्ते एक यूरो डॉलर के बराबर होते हैं. जिसके पास अधिक यम (कंदमूल) होते हैं, उसे सबसे सुखी कहा जाता है। अच्छे क्रिकेट खिलाड़ियों को रतालू भेंट की जाती है।इस जनजाति में सबसे अजीब परंपरा यह है कि पुरुष और महिलाएं कभी भी शादी कर सकते हैं और कभी भी सेक्स कर सकते हैं। इसलिए इस क्षेत्र को दुनिया का सबसे मुक्त प्रेम क्षेत्र माना जाता है।
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